Friday, August 26, 2011

कुछ दिल में है


वह मोड़ कोई अनजाना था
कुछ गुजर गया.. कुछ दिल में है !!
सदियों से थमा जमाना था 
कुछ गुजर गया.. कुछ दिल में है !!

एक पेड़ जिनके शाखोंपर 
फूलोंके सपने खिलते थे .. 
काँटों का अपना फ़साना था 
कुछ बिखर गया.. कुछ दिल में है !! 

एक मंजर वो भी सुहाना था
लहरें साहील को चूमती थी..  
अब एक अकेला साहील है 
कुछ बह सा गया.. कुछ दिल में है !! 

आंसू की अपनी कहानी है 
पिछले सावन की निशानी है .. 
उस दर्द से रिश्ता पुराना है 
कुछ भूल ही गया.. कुछ दिल में है !!!

भक्ति आजगावकर


6 comments:

  1. वाह... छान झालीये कविता! आवडली
    inspired आहे का?

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  2. क्या बात है

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  3. chaan....btw kis ke baare mein baat ho rahi hai is kavita mein

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  4. आज पहिल्यांदा तुझ्या ब्लॉग वर आले... आणि तुझी हि कविता वाचून खरच हे तुझ्या ब्लॉगवर येणे सार्थकी लागले म्हणायला लागेल! प्रत्येक कडव्यातून किती काही सांगते आहेस ग! कविता खूप काही मनातले सांगत असते कित्येकदा इतकी भावपूर्ण होते कि क्या बात है! भक्ती छान आहे तुझा ब्लॉग आणि काव्य पण!

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  5. Thanks Abhishek, Om n Akshay....

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  6. श्रिया...

    किती मनापासून लिहिलेयस ग .... खरेच मनापासून धन्यवाद...
    कवितेचे हे मनात हिंदकळणे अलवार जुईचेच... पण सुगंधाची ही देवाण घेवाण अजून ही सुगंधित करणारी ...
    ब्लॉगवर स्वागत...!!!

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